Contract Employees Latest News: सरकार ने प्रदेश में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड के गठन की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। यह निगम कंपनी एक्ट 2013 की धारा 8 के प्रावधानों के अनुसार पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में नॉन-प्रॉफिट आधार पर संचालित होगा।
इस ऐतिहासिक निर्णय से न सिर्फ हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा लाभ पहुंचेगा, बल्कि विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से चल रही एजेंसियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी। यह पहल कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा और पारदर्शी कार्य प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।
क्यों जरूरी था आउटसोर्स सेवा निगम का गठन
प्रदेश भर में आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ होने वाले शोषण को रोकने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक था। अब तक विभिन्न सरकारी विभागों में विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त किए जाते थे। इन कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता था और न ही उन्हें EPF (भविष्य निधि) और ESI (कर्मचारी राज्य बीमा) जैसी बुनियादी सुविधाओं का लाभ प्राप्त होता था।
कई बार तो एजेंसियां मनमाने ढंग से कार्य करती थीं और कर्मचारियों के हक में कटौती कर देती थीं। इन सभी समस्याओं के कारण आउटसोर्स कर्मचारी खुद को असुरक्षित और उपेक्षित महसूस करते थे। अब निगम के गठन के बाद इन सभी कठिनाइयों का समाधान होगा और कर्मचारियों को उनके वैध अधिकार मिल सकेंगे।
वेतन वृद्धि के साथ आरक्षण की सुविधा
आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के साथ ही कर्मचारियों के वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। अब प्रत्येक आउटसोर्स कर्मचारी को न्यूनतम ₹20,000 का मासिक मानदेय दिया जाएगा। इसके अलावा यह सुनिश्चित किया गया है कि हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच कर्मचारियों के बैंक खाते में वेतन जमा कर दिया जाएगा। साथ ही भविष्य निधि और कर्मचारी राज्य बीमा का अंशदान भी सीधे उनके खाते में स्थानांतरित किया जाएगा।
कर्मचारियों की सेवा अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है, जो उन्हें नौकरी की सुरक्षा प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, आरक्षण नीति का भी सख्ती से पालन किया जाएगा, जिसमें महिला कर्मचारियों के लिए विशेष आरक्षण का प्रावधान रखा गया है।
Contract Employees Latest News चार श्रेणियों में होगी वेतन की व्यवस्था
वर्तमान में अधिकांश आउटसोर्स कर्मचारियों को मात्र ₹10,000 से ₹12,000 के बीच अत्यंत कम वेतन मिल रहा है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा और उनके कार्य की प्रकृति के अनुसार वेतन निर्धारित किया जाएगा। श्रेणी-1 के कर्मचारियों को ₹20,000 प्रति माह का वेतन मिलेगा। श्रेणी-2 में आने वाले कर्मचारियों का मासिक वेतन ₹22,500 रखा गया है।
श्रेणी-3 के कर्मचारियों को ₹25,000 का वेतन प्राप्त होगा, जबकि श्रेणी-4 में कार्यरत कर्मचारियों को ₹40,000 तक का वेतन दिया जाएगा। यह वेतन पूर्णतया पारदर्शी तरीके से हर महीने की 5 तारीख तक सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा कर दिया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार की विलंब या कटौती की संभावना नहीं रहेगी।
आउटसोर्स सेवा निगम से मिलने वाले प्रमुख लाभ
नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब विभाग स्वयं एजेंसियों का चयन नहीं करेंगे। इसके बजाय उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से एजेंसियों का चयन करेगा। कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी आमूल परिवर्तन किए गए हैं। अब लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर योग्य और कुशल उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा, जिससे योग्यता को प्राथमिकता मिलेगी। सेवा अवधि को तीन वर्ष निर्धारित करने से कर्मचारियों को नौकरी की स्थिरता मिलेगी।
हालांकि, किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या कर्तव्य में लापरवाही पाए जाने पर सेवा तत्काल समाप्त करने का प्रावधान भी रखा गया है। इन सभी सुधारों के साथ सामाजिक सुरक्षा और संवैधानिक आरक्षण की गारंटी भी सुनिश्चित की जाएगी, जो कर्मचारियों के समग्र कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
